अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को नई दिल्ली स्थित अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम सभागार में अलंकृत किया गया। अनुवाद की परंपरा में 'गुजराती दलित' कविता के लिए मालिनी गौतम को सम्मानित किया गया। अष्टभुजा शुक्ला, नरेश सक्सेना, आलोक भल्ला जी सबको स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कविता वर्ग में संग्रह 'उपशीर्षक' के लिए कुमार अंबुज को 'छाप' से सम्मानित किया गया। वहीं, कथा वर्ग में मनोज रूपड़ा के कहानी संग्रह ‘दहन ’ तथा कथेतर वर्ग में दलपत सिंह राजपुरोहित की कृति 'सुन्दर के स्वप्न' को वर्ष की श्रेष्ठ कृति का सम्मान दिया गया। किसी भी रचनाकार की पहली किताब वाला 'थाप' पुरस्कार चिन्मयी त्रिपाठी की कृति 'अपनी कही' को दिया गयाष भारतीय भाषाओं में अनुवाद का भाषा-बंधु सम्मान 'गुजराती दलित कविता' के हिंदी अनुवाद के लिए मालिनी गौतम को प्रदान किया गया।
विनोद कुमार शुक्ल को आकाशदीप सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके पुत्र ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने वीडियो मैसेज के जरिए निर्णायक मंडल का आभार जताया। एमटी वासुदेवन नायर को भी आकाशदीप सम्मान दिया गया। उनके परिवार के सदस्य ने यह ग्रहण किया।
पंडित हरि प्रसाद चौरसिया दे रहे बांसुरी की संगीतमय प्रस्तुति
पंडित हरिप्रसाद इस अवसर पर ग्रैमी पुरस्कार विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया के साथ विशेष संगीत प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले राग यमन सुनाया। अपनी विशेष संगीत प्रस्तुति देने से पहले पंडित हरि प्रसाद चौरसिया ने कहा कि इससे पहले आप निकलना शुरू करें मैं बजाना चाहता हूं और अच्छी तरह से बजाना चाहता हूं। ताकि अगली बार भी मैं और आप लोग यहां मिलें। उन्होंने बताया कि मैं आज यमन राग बजाऊंगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस राग को दक्षिण भारत में कल्याणी के नाम से जाना जाता है।
हरिप्रसाद चौरसिया जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्य के साथ संगीत भी जुड़ जाए तो बहुत बढ़िया बात हो जाती है। बहुत बड़ी बात है कि हमारे कलाकारों, लेखकों, साहित्यकारों को अमर उजाला सम्मान दे रहा है। हर वर्ष यह परंपरा कायम रहे, यही आशा रखता हूं। यह परंपरा पांच साल से कायम है और आगे पचासों वर्ष तक भी कायम रहेगी। हर बार दिल्ली में आता हूं तो बांसुरी से बात करता हूं, इस बार शब्दों से भी बात करने का मौका मिल रहा है, इस बात की प्रसन्नता है।
आखिरी में अमर उजाला के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने धन्यवाद वक्तव्य दिया। अपने वक्तव्य में राजुल माहेश्वरी ने वहां उपस्थित सभी लोगों का आभार जताया। इसके बाद अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी, एमडी तन्मय माहेश्वरी और प्रेसीडेंट वरुण माहेश्वरी ने पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित राकेश चौरसिया और पंडित रामकुमार मिश्र को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
2 वर्ष पहले
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