हिंदी के प्रख्यात कथाकार-संपादक ज्ञानरंजन और मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे को मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित वाईबी चव्हाण सेंटर में आयोजित समारोह में अमर उजाला शब्द सम्मान के सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से नवाजा गया। इसके अलावा अन्य साहित्यकारों को भी उनकी कृति और योगदान के लिए सम्मान दिया गया। दोनों मनीषियों को लेखन-जीवन के समग्र अवदान के लिए यह सम्मान दिया गया। मशहूर शायर-फिल्मकार गुलजार इन्हें अलंकरण प्रदान किया। गत वर्ष यह सम्मान डॉ. नामवर सिंह को हिंदी के लिए और गिरीश कारनाड (कन्नड़) हिंदीतर भाषा में विशेष योगदान के लिए दिया गया था।
आकाशदीप अलंकरण सम्मान मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेवाडे और हिंदी के प्रख्यात कथाकार-संपादक ज्ञानरंजन को दिया गया।
-कथेतर वर्ग में 'छाप' सम्मान सुनीता बुद्धिराजा की कृति ‘रसराज: पंडित जसराज’ को दिया गया।
-किसी भी रचनाकार की पहली किताब के लिए 'थाप' सम्मान अंबर पांडेय की कृति ‘कोलाहल की कविताएं' को मिला।
-भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए भाषाबंधु सम्मान प्रख्यात रचनाकार शंख घोष की बांग्ला गद्य कृति ‘नि:शब्द की तर्जनी’ के हिंदी अनुवाद के लिए उत्पल बैनर्जी को प्रदान किया गया।
-'छाप' श्रेणी में कथा (उपन्यास) वर्ग में ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास 'पागलखाना' को सम्मान मिला।
-कविता वर्ग में गगन गिल के संग्रह 'मैं जब तक आई बाहर' को यह सम्मान दिया गया।
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