अमर उजाला काव्य कैफे़ में इस बार प्रेम कविताओं/गीतों की बारिश होने वाली है। वैलेंटाइन डे को ध्यान में रखते हुए इस बार ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें देश के कोने- कोने से जुड़ने वाले कवि अपनी प्रेम कविताओं के साथ कार्यक्रम को ख़ास बनाएंगे। कार्यक्रम 13 फरवरी की शाम को 4 बजे से शुरू होगा। इस बार का काव्य-कैफ़े श्रृंगार रस पर आधारित होगा। इसका प्रसारण अमर उजाला और अमर उजाला काव्य के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल से लाइव किया जाएगा। कार्यक्रम में शिरकत करने वाले शायर/कवि/कवयित्री हैं-
डाॅ ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि-गीतकार-आलोचक हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से ताल्लुक रखते हैं लेकिन वे दिल्ली में ही रहते हैं। उनके गीतों-कविताओं का एक खूबसूरत संग्रह 1987 में छपा और तब से कविता-गीत-ग़ज़ल सभी विधाओं में वे लगातार लिखते रहे हैं। हिंदी कविता के अथक पाठक-विश्लेषक एवं समालोचक होने के नाते वे पांच दशकों के हिंदी काव्य के सबसे विश्वसनीय एवं बहुपठित समीक्षकों में गिने जाते हैं। उन्हें हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा 'नवोदित लेखक पुरस्कार', हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार', जश्ने अदब द्वारा 'शान ए हिंदी' खिताब से एवं कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था विचार मंच द्वारा 'प्रो.कल्याणमल लोढ़ा साहित्य सम्मान' से सम्मानित किया जा चुका है।
इंदु श्रीवास्तव, ग़ज़लगो हैं, जबलपुर, मध्यप्रदेश से हैं। विगत 25 सालों से समकालीन ग़ज़ल पर कार्य कर रही हैं। अब 3 ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं- आशियाने की बातें (2008), उड़ना बेआवाज़ परिंदे (2012), बारिश में जल रहे हैं खेत (2017)। इसके अलावा गीत संग्रह- भोर पनिहारन और दोहा संग्रह- तू ही मेरा जोगिया भी प्रकाशित है। 'बादलों के रंग' नाम से ग़ज़ल एल्बम भी रिलीज़ हो चुका है। इंदु जी राष्ट्रीय स्तर के काव्य मंचों, दूरदर्शन, आकाशवाणी इत्यादि जगहों से अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
डॉ. श्रुति मिश्रा लंबे समय से हिंदी साहित्य सर्जना से जुड़ी हुई हैं। काव्य की छंद परंपरा से जुड़ाव छात्र जीवन से ही रहा है । कविताओं के मंचीय पाठ के अतिरिक्त स्वतंत्र रूप से लेखन और प्रकाशन जारी है । कविताओं, गीतों के अतिरिक्त इनकी कहानियां भी बहुत पसंद की जाती हैं। इसके अतिरिक्त ललित निबंध,काव्य समीक्षाओं में भी इनका निरंतर कार्य चल रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा दीक्षा प्राप्त, वहां की टॉपर तथा अपनी बहुमुखी गतिविधियों के चलते बीएचयू का बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड प्राप्त कर चुकीं डॉ. श्रुति पिछले 13 वर्षों से शिक्षा जगत में सक्रिय संप्रति काशी हिंदू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
कृति चौबे सोनभद्र, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं, श्रृंगार रस की कविताएं लिखती हैं और उन्मुक्त कंठ से तरन्नुम में गाती हैं। उनकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं-
किसी की आंख से आंसू की बूंदें पोंछकर देखो
कभी ख़ुद को भुलाकर ख़ुद से आगे सोचकर देखो
दिलों से छूट जाएंगी गिले शिकवे की हर गांठें
अदावत भूल जाओगे मोहब्बत सोचकर देखो
वासु पांडेय बहादुगंज, फर्रुखाबाद के रहने वाले हैं, युवा शायर हैं, ग़ज़ल उनकी विधा है। देश के बड़े-बड़े मुशायरों/कवि सम्मेलनों में उन्हें काव्यपाठ के लिए बुलाया जाता है। मिशाल के तौर पर उनकी कुछ पंक्तियां देखिए-
दिये केवल सजावट के लिये हैं
तेरे होने से घर में रौशनी है
तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुमसे कहे "तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम"
यूँ भी कटने लगा हूँ अब मैं ग़ैर-मुनासिब यारों से
बारिश वफ़ा नहीं कर सकती मिट्टी की दीवारों से
दुखे हुये लोगों की दुखती रग को छूना ठीक नहीं
वक़्त नहीं पूछा करते हैं यारों वक़्त के मारों
मौसम कुमरावत स्वयं को हिन्दी साहित्य का विद्यार्थी मानते हैं जो मुख्य रूप से श्रृंगार के मुक्तक व गीत लिखते हैं। मौसम बेंगलुरु में कार्यरत हैं और 'शेयर किताब' व 'हुनर' संस्थाओं के संस्थापक भी। मौसम कई मंचों पर काव्यपाठ कर चुके हैं।
मौसम कहते हैं-
वेदना के ज्वार को भी हँसते-हँसते सह गए,
पीर जो भी मन में थी वो पूरे मन से कह गए,
नीर से भरे नयन थे, था भावों से भरा हृदय,
भाव गीत में गढ़े तो नयन से नीर बह गए।
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4 वर्ष पहले
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