अध्ययन कक्ष: जंगल भी सांस लेते हैं
व्हेन द फॉरेस्ट ब्रीथ्सः रीन्यूअल एंड रीजिलेंस इन द नेचुरल वर्ल्ड
लेखिका : सुजैन सिमार्ड
प्रकाशक : पेंगुइन
हाल ही में प्रकाशित यह बेस्टसेलर किताब कोई पर्यावरणीय शोध नहीं है। लेखिका अपनी जिंदगी के अनुभवों को जंगलों के चक्र से जोड़ते हुए बताती हैं कि घर के बुजुर्गों की तरह अगर हम जंगलों की देखभाल करेंगे, तभी हम उन्हें बचा सकेंगे और खुद को भी।
वन पारिस्थितिकीविद् और फाइंडिंग द मदर ट्री (2021) की लेखिका सुजैन सिमार्ड ने ब्रिटिश कोलंबिया के भू-दृश्य और वहां के पौधों व जानवरों के बीच की परस्पर क्रिया का अध्ययन करने में दशकों बिताए हैं। हाल ही में, उन्होंने छात्रों की एक टीम और प्रांत के मूल निवासी समुदायों के साथ मिलकर आठ साल का एक ‘मदर ट्री प्रोजेक्ट’ चलाया, जिसका उद्देश्य वनों पर पेड़ काटने के विभिन्न तरीकों के प्रभावों का अध्ययन करना था।
सिमार्ड अपनी नई किताब व्हेन द फॉरेस्ट ब्रीथ्स में एक बार फिर हमें पेड़ों के बीच ले जाती हैं, जहां वह अपने शोध को आगे बढ़ाते हुए अपनी विरासत पर भी विचार करती हैं। इस किताब में सुजैन सिमार्ड ने अपने वर्षों के शोध और अनुभवों के आधार पर बताया है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि वे एक जीवित और आपस में जुड़े हुए समुदाय की तरह काम करते हैं। सिमार्ड के मॉडल के अनुसार, जंगल में सबसे बड़े और पुराने पेड़ ‘मातृ वृक्ष’ की तरह काम करते हैं। वे नए पौधों को बढ़ने में मदद करते हैं, बीज फैलाते हैं और पूरे जंगल को जीवन और ऊर्जा देने का काम करते हैं। इस किताब को पढ़ते हुए लगता है कि सिमार्ड भी एक प्रकार की मातृ वृक्ष ही हैं-एक विशाल, गहरी जड़ों वाली शख्सियत, जो वन पारिस्थितिकीविदों की अगली पीढ़ी को जोड़ने और उनका समर्थन करने में बखूबी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
किताब में सिमार्ड अपने प्रयोगों को करने के उत्साह के साथ उन मुश्किलों का भी खुलकर वर्णन करती हैं, जिनका उन्हें सामना करना पड़ा। कभी उन्हें तेज बारिश में सैकड़ों छोटे पौधों की माप लेनी पड़ी, कभी जंगल की आग से जान बचाकर भागना पड़ा, और कभी लकड़ी काटने वाली कंपनियों के अधिकारियों से टकराव झेलना पड़ा। उनके अनुसार, जंगलों के संरक्षण और उन्हें फिर से जीवित करने के लिए वैज्ञानिक शोध से इतर दूसरे तरीकों की भी जरूरत है। यह किताब उसी कोशिश का हिस्सा है, जिसके जरिये वह अपने शोध, अनुभव और उसके पीछे की सोच को आसान और व्यापक तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहती हैं। जंगल की गहराइयों में किए गए इस काम में एक तरह की कविता छिपी है, और वह इसे सुनाने में जरा भी कतराती नहीं हैं। वह ऐसे ढेरों सबूत पेश करती हैं, जिनसे पता चलता है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और भारी मशीनों के इस्तेमाल से जंगलों का दोबारा उगना लगभग नामुमकिन हो जाता है। वह इस बारे में भी ज्यादा आशावादी बातें बताती हैं कि जब किसी इलाके में बड़े पेड़ों को छोड़ दिया जाता है और सिर्फ छोटे पेड़ों को काटा जाता है, तो क्या होता है।
सिमार्ड जंगल में रहने वाले हर छोटे-बड़े जीव-जैसे फफूंदी, काई, गिलहरियां, भालू और विशाल पुराने पेड़ों-के प्रति जिस काव्यात्मक अंदाज में अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं, वह उनके गूढ़ वैज्ञानिक विचारों में एक भावनात्मक गहराई जोड़ देता है। ऐसा महसूस होता है कि उन्होंने व्हेन द फॉरेस्ट ब्रीथ्स इसलिए लिखी है, ताकि और लोग भी प्रकृति को समझने और उससे जुड़ने की इस सोच को अपनाएं या अपनी नई राह खोज सकें।
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