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स्प्लिट -ए लाइफ़: दुस्साहस की कीमत

tasleema nasreen split a life book review in hindi
                
                                                         
                            
‘द्विखंडितो’ का यह अनुवाद अपने वृहत आकार के कारण चौंकाता तो है ही, अनुवाद में बरती गई गोपनीयता के कारण हैरान भी करता है, जिस पर खुद लेखिका भी आश्चर्य प्रकट करती हैं।

तस्लीमा नसरीन की आत्मकथा के तीसरे और बहुचर्चित खंड 'द्विखंडितो' का यह अनुवाद भले करीब पंद्रह साल बाद आया हो, पर अपने कुल प्रभाव में यह किताब झकझोर देने वाली है। यह किताब उनके डॉक्टर बन जाने से लेकर बांग्लादेश में उनके लगभग बंदी जीवन बिताने पर केंद्रित है। पिता दो बार उन्हें उनकी स्वतंत्र सोच के लिए सजा देते हैं, एक बार घर में बंद करके रखते हैं, जहां से वह भागकर ढाका पहुंचती हैं। दूसरी बार ढाका में उनके घर से पीटते हुए जबरन मैमनसिंह ले आते हैं। उनके कठोर पिता के सामने उनकी ममतामयी मां को खामोश रहना पड़ता है। ऐसे ही उनके पति भी उनका शोषण करते हैं। व्यक्ति के अलावा लेखिका के तौर पर भी वह   बार-बार निशाना बनीं। कभी उन्हें पुरुष-विरोधी दुस्साहसी पंक्तियों को कविता से निकाल देने के लिए कहा गया, तो कभी पुस्तक मेले में उन्हें प्रतिबंधित किया गया। उन पर हमले की कोशिश से लेकर उनकी किताबें जला डाली गईं, कभी तो शहर में उनके खिलाफ जुलूस निकले और फतवे जारी हुए।

तस्लीमा को उनकी दुस्साहसी कविताओं ने...

तस्लीमा को उनकी दुस्साहसी कविताओं ने बेशक पहचान दी, लेकिन जिस विधा ने उन्हें पूरे बांग्लादेश के बौद्धिक वर्ग और महिलाओं में बेहद लोकप्रिय बनाया, वह अखबारों में उनका कॉलम था, जिसमें उन्होंने पुरुष प्रधान सामाजिक मान्यताओं की धज्जियां उड़ा दीं। अखबारों में छपे उनके चुनिंदा लेखों के संग्रह (निर्वाचित कलाम) पर ही उन्हें प्रतिष्ठित आनंद पुरस्कार मिला। हालांकि, आनंद पुरस्कार मिलने पर बांग्लादेश के साहित्यकारों ने ईर्ष्या से उन्हें रॉ का एजेंट तक बता डाला। बांग्लादेश के साहित्य जगत में तस्लीमा पर भारत की पक्षधर लेखिका होने का दूसरी बार आरोप तब लगा, जब उन्हें 'लज्जा' के लिए दूसरा आनंद पुरस्कार मिला। हालांकि, 'लज्जा' उनकी बहुत महत्वाकांक्षी किताब नहीं थी, लेकिन प्रकाशकों के तगादे पर उन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हुई हिंदू-विरोधी हिंसा पर एक तथ्य आधारित उपन्यास लिखा। लेकिन अनुमान के विपरीत उसने बिक्री और लोकप्रियता के तमाम कीर्तिमान तोड़ दिए। 
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तस्लीमा को उनकी दुस्साहसी कविताओं ने...

8 वर्ष पहले

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