आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रेखाएं बोलती हैं, भाग-2

rekhaein bolti hain part 2 book review in hindi
                
                                                         
                            

कितने चेहरे, कितनी यादें, कितनी घटनाएं, कितने आंसू और कितनी ही हंसी। जीवन में अपने साथ हम कितना कुछ लेकर चलते हैं। रेखाचित्र इन्हीं स्मृतियों को शब्दों में संजोने का नाम है। रेखाचित्र एक तरह से स्मृतियों की फोटोकॉपी ही तो है। रेखाचित्र हिंदी साहित्य की एक भूली-बिसरी विधा है। इस विधा में शब्दों के माध्यम से शब्द-चित्र बनाए जाते हैं। ऐसी ही विन्यासों से सजी किताब है 'रेखाएं बोलती हैं, भाग-2'। किताब में हिंदी के कई लेखकों की स्मृतियों को संजोया गया है।


रेखाएं बोलती हैं, भाग-2
संपादन- गीताश्री
प्रकाशक- शिवना प्रकाशन, सीहोर
मूल्य- 250 रुपये 

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर