शहरी माओवाद की सच्चाई को पेश करता उपन्यास 'लाल अंधेरा' उन घटनाओं और पात्रों का विवरण देता है, जिनकी कभी चर्चा भी नहीं होती। सरकारी व्यवस्था और माओवादियों के बीच पिसने वाले आदिवासियों का जीवन भी किसी दुविधा से कम नहीं है। यह बस्तर का ऐसा कड़वा सत्य है, जिसके विषय में हर किसी को अवश्य जानना चाहिए। यह कहानी उस विषयवस्तु के इर्द-गिर्द भी बुनी गई है, जिसकी इन दिनों व्यापक चर्चा है- शहरी माओवाद। उपन्यास की भाषा में प्रवाह है।
किताब- लाल अंधेरा
लेखक- राजीव रंजन प्रसाद
प्रकाशक- यश पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
मूल्य- 199 रुपये
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