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कर्म सूत्र - कर्म के रहस्यों पर बात

karm sutra book review in hindi
                
                                                         
                            

कर्म और उसके प्रतिफल, दर्शन की समस्याओं और आध्यात्मिक प्रश्नों के मुख्य अंग हैं। भारतीय चिंतन परंपरा मानती है कि हमारे कर्म ही यह परिभाषित करते हैं कि वर्तमान जन्म में हमारा जीवन कैसा होगा और हमारे भावी जीवन की नियति क्या होगी? शरीर, मन, इंद्रियों और बुद्धि द्वारा किए गए सभी कार्य कर्म कहलाते हैं। हम हर पल कोई न कोई कर्म करते ही रहते हैं। यहां तक कि कर्म करने से बचना भी एक तरह का कर्म है। किताब 'कर्म सूत्र' में कर्मफल के मूल सिद्धांतों पर विचार किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस पुस्तक के लेखक हिंगोरी ने अपने जीवन का आधा हिस्सा  एक नास्तिक के रूप में बिताया है। उनके आस्तिक होने की कहानी भी बड़ी रुचिकर है।

अपने जीवन के शुरुआती वर्षों के दौरान हिंगोरी गठिया के मरीज थे और वह इससे 10 वर्षों तक पीड़ित रहे। उसके बाद एक दिन उनकी मुलाकात एक ऐसे योगी से हुई, जिसने 60 सेकंड में उनकी बीमारी ठीक कर दी। उसके बाद उनका जीवन बदल गया। हिंगोरी ने अपना जीवन दर्शन, अध्यात्म और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। इस किताब में प्रसिद्ध संतों के वास्तविक जीवन की कहानियां हैं। लेखक ने कर्म और भाग्य के गूढ़ प्रश्नों को सुलझाने की कोशिश की है और कर्म के नियमों के पीछे के रहस्यों पर प्रकाश डाला है। कर्म, भाग्य को कैसे प्रभावित कर सकता है, इस प्रश्न का उत्तर भी इस किताब में ढूंढने की कोशिश की गई है।
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6 वर्ष पहले

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