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गुरुदेव शिखर पर अचल: एक संत के देखे, सुने और समझे संसार का सार

Gurudev shikhar par achal book review in hindi
                
                                                         
                            
लेखिका ने श्री श्री के प्रतिपादनों को कथा संस्मरण और कह सकते हैं कि आंखों देखे विवरण की तरह उकेरा है। यहां हिसाब-किताब की तरह उबाऊपन नहीं, रस और रवानी है। 

तमिलनाडु के एक कुलीन अय्यर परिवार में जन्मे श्री श्री रविशंकर के पिता आदि गुरु शंकराचार्य से बहुत प्रभावित थे। कहते हैं कि इसी कारण उन्होंने अपने बेटे का नाम रविशंकर रखा। कुछ वर्ष बाद महर्षि महेश योगी ने उन्हें अपने ध्यान आंदोलन में दीक्षित किया। रविशंकर, ब्रह्मचारी बटुक की तरह पढ़े, महेश योगी के गुरुकुलों में भी और उनके चलाए शिक्षा संस्थानों में भी। यह 1971 के आसपास की बात है। विश्व के आध्यात्मिक आकाश में महेश योगी धूमकेतु की तरह उदित हुए और छा रहे थे। उस अवस्था में श्री श्री जैसे तेजस्वी शिष्य, महर्षि के लिए एक अनूठी संपदा की तरह ही थे। उस समय श्री श्री भौतिकी की डिग्री लेकर ही निकले थे। उनकी बहन और लेखिका भानुमति नरसिंम्हन का कहना है कि श्री श्री ने महर्षि महेश योगी के काम को तो आगे बढ़ाया ही, उसे वैश्विक आयाम भी दिया। प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रवि शंकर ने उन पर आरोप लगाया कि वे उनके यश का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन कम ही लोगों के गले यह बात उतरी। इसके बाद उनके नाम के आगे श्री श्री जुड़ा। 
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आर्ट आॅफ लिविंग ने...

8 वर्ष पहले

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