दुनिया में शायद ही कोई भी व्यक्ति होगा, जिसके मन में प्रेम की भावनाओं के उतार-चढ़ाव न आते हों। प्रेम से उपजी बेचैनियों के साथ इंसान अपना हर पल बिताता है। मनोभावों के मूल में ये बेचैनियां ही तो हैं। खुशी, गम, मिलना और बिछड़ना, जाने कितने अहसास इनसे जन्म लेते हैं और हमें मानवीय गुणों से परिपूर्ण करते हैं। प्रेम का यह दायरा केवल स्त्री और पुरुष तक ही सीमित नहीं है। वृहद रूप में देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के आपसी मिलन और विछोह की गाथा है। शिशिर मधुकर की कविताएं इन्हीं भावों का शब्दांकन हैं।
किताब- बेचैनियां
लेखक- शिशिर मधुकर
प्रकाशक- नोशन प्रेस, चेन्नई
मूल्य- 270 रुपये
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