अमर उजाला शब्द सम्मान
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छाप (कविता) - सविता सिंह - वासना एक नदी का नाम है
यह सृष्टि की वासना है...स्त्रीवादी नजरिये से वासना, प्रेम जैसे शब्दों का मैं अपने ढंग से अर्थ खोज रही हूं। पितृसत्ता में जहां स्त्रियों का दर्जा कभी भी समान नहीं होता, उसकी मनुष्यता को नष्ट करने के हर प्रयास होते हैं। इन सबसे बचकर स्त्री अपने जीवन को गहराई में ले जाती है। वहां उसे पता चलता है कि यह सृष्टि की वासना है। उसमें कहीं कोई खोट नहीं है।
छाप (कथेतर) - नाइश हसन - मुताह
स्त्री की मर्यादा का प्रश्न - उन लड़कियों की जिंदगी को देखकर हैरान हुई, जिन्होंने जीवन में कई बार मुताह की तकलीफ को बर्दाश्त किया। दो बालिग लोग अगर सहमति से साथ रह रहे हैं तो कोई सवाल नहीं, लेकिन अगर इसमें मर्जी नहीं है और बहुत कुछ छिपा है तो यह सवाल स्त्री गरिमा और मर्यादा के बिल्कुल खिलाफ है। मैंने इसी नजरिये से इस किताब को लिखा है।
छाप (कथा) - शहादत - कर्फ्यू की रात
समाज की रूढ़ियों पर बात - ये कहानियां मुस्लिम समाज की बुनियादी समस्याओं पर बात करती हैं। यह ऐसा है कि आप एक ऐसे नरम-नाजुक फल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंदर से सड़ रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि जब समाज की रक्षा के लिए हम सब दांव पर लगा रहे हैं तो उन परंपराओं और रूढ़ियों पर भी बात की जाए, जिसने उसमें ठहराव ला दिया।
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