अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेहरान न्यूक्लियर डील करने में नाकाम रहता है, तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप की यह टिप्पणी उस वक्त सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ओमान की राजधानी मस्कट में परमाणु समझौते को लेकर आमने-सामने बैठे थे।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान डील के लिए “बेहद उत्सुक” है और मौजूदा बातचीत पिछली कोशिशों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने यह भी दोहराया कि एक “विशाल अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा” ईरान की दिशा में बढ़ रहा है, जो बहुत जल्द वहां पहुंच जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के बाद कहा, “ईरान पर बहुत अच्छी बातचीत हुई है। ऐसा लगता है कि ईरान डील करने के लिए बुरी तरह बेकरार है। यह डील पिछली बार से अलग होगी। हमारा एक विशाल बेड़ा उस दिशा में जा रहा है और वह बहुत जल्दी वहां पहुंच जाएगा।”
ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका के पास समय की कोई कमी नहीं है, लेकिन ईरान को सही स्थिति में आना होगा। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि बातचीत के साथ-साथ सैन्य दबाव भी अमेरिका की रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, “हमारी ईरान के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई है। रूस और यूक्रेन के साथ भी बात हो रही है। ईरान डील करना चाहता है और उसे करनी भी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें अंजाम पता हैं।”
ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी समझौते की सबसे बड़ी और गैर-समझौता योग्य शर्त यही होगी कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे। उनके मुताबिक, अमेरिका इस मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में हुई। इस बैठक में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने किया।
यह बैठक लंबे समय बाद दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। हालांकि बातचीत के बाद भी कई मुद्दों पर मतभेद साफ नजर आए।
बातचीत के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी बातचीत के लिए धमकियों और सैन्य दबाव से बचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तेहरान केवल अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ही बातचीत करेगा और किसी दूसरे मुद्दे को बातचीत के एजेंडे में शामिल नहीं किया जाएगा।
अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय गतिविधियों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। इससे पहले आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम को भी डील का हिस्सा बनाना चाहता है, लेकिन ईरान ने इस पर साफ इनकार कर दिया।
ट्रंप के बयानों से साफ है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए है, तो दूसरी तरफ सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर दबाव भी बना रहा है। अमेरिकी बेड़े की तैनाती और सार्वजनिक चेतावनियों को ईरान के लिए एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं ईरान यह संकेत दे रहा है कि वह परमाणु कार्यक्रम पर सीमित बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव की राजनीति उसे मंजूर नहीं। ऐसे में आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह वार्ता किसी नई न्यूक्लियर डील तक पहुंचेगी या फिर मध्य-पूर्व एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।