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बहिष्कार के बाद भी नेतन्याहू के साथ खड़े रहे ये 4 देश!

Sat, 26 Sep 2026 03:30 AM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

UNGA में नेतन्याहू के भाषण से पहले ऐसा क्या हुआ कि 77 देशों ने दूरी बना ली? क्या गाजा युद्ध को लेकर इजरायल के खिलाफ बढ़ता अंतरराष्ट्रीय विरोध अब UN के मंच पर भी साफ दिखने लगा है? और जब बेंजामिन नेतन्याहू का UNGA में 77 देशों ने किया बहिष्कार तो वो 4 मुस्लिम मुल्क कौन से थे जो इजरायली पीएम के साथ चट्टान की तरह डटे

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच गुरुवार को उस वक्त चर्चा में आ गया, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भाषण देने पहुंचे। नेतन्याहू के संबोधन से पहले और उसके दौरान बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। इजरायल की ओर से जारी गिनती के मुताबिक, 77 देशों के प्रतिनिधिमंडल या तो हॉल में मौजूद नहीं थे या नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत में बाहर चले गए। हालांकि, इन सभी अनुपस्थितियों को औपचारिक बहिष्कार मानना सही नहीं होगा, क्योंकि कुछ प्रतिनिधिमंडल सत्र में पहले से मौजूद नहीं थे। 

इस वॉकआउट में कई अरब और मुस्लिम-बहुल देश शामिल रहे। सऊदी अरब, जॉर्डन, तुर्की, ईरान, पाकिस्तान, कतर, ओमान, इंडोनेशिया, मलेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडलों की गैरमौजूदगी या वॉकआउट दर्ज किया गया। पाकिस्तान के मामले में इजरायली अधिकारियों के अनुसार उसका प्रतिनिधिमंडल विरोध में बाहर गया, लेकिन बाद में किनारे से भाषण सुना। 

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में चार मुस्लिम-बहुल देशों की मौजूदगी खास तौर पर चर्चा में रही संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, बहरीन, मोरक्को और अजरबैजान। इन चारों के प्रतिनिधिमंडल उन 77 देशों की सूची में शामिल नहीं थे। हालांकि, इसे सीधे तौर पर नेतन्याहू या इजरायल के समर्थन के रूप में पेश करना सावधानी मांगता है। उनकी मौजूदगी मुख्य रूप से इजरायल के साथ उनके मौजूदा राजनयिक या रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में देखी जा रही है। 

सबसे पहले बात UAE की। संयुक्त अरब अमीरात ने 2020 में अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य किए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक रिश्तों का विस्तार हुआ। गाजा युद्ध के बाद इन संबंधों को लेकर राजनीतिक तनाव जरूर बढ़ा है, लेकिन राजनयिक संबंध कायम हैं। 

इसके बाद आता है बहरीन। बहरीन भी 2020 के अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले अरब देशों में शामिल था। यानी UAE की तरह बहरीन के भी इजरायल के साथ आधिकारिक संबंध हैं। यही वजह है कि UNGA में बहरीन का प्रतिनिधिमंडल नेतन्याहू के भाषण के दौरान हॉल में मौजूद रहा।

तीसरा नाम है मोरक्को। दिसंबर 2020 में मोरक्को ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू की थी। दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग इसके बाद आगे बढ़ा।

और चौथा देश है अजरबैजान। अजरबैजान का मामला बाकी तीन देशों से अलग है। उसने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन इजरायल के साथ उसके रणनीतिक रिश्ते हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग रहा है। यही वजह है कि UNGA में अजरबैजान की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। 

दूसरी तरफ, नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया और ईरान समेत अपने विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हॉल से बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों पर भी तीखी टिप्पणी की। उनके भाषण के दौरान कुछ प्रतिनिधियों की ओर से हूटिंग और विरोध की आवाजें भी सुनाई दीं। 

यानी UNGA का ये घटनाक्रम सिर्फ एक भाषण तक सीमित नहीं रहा। एक तरफ 77 प्रतिनिधिमंडलों की गैरमौजूदगी और वॉकआउट ने अंतरराष्ट्रीय विरोध की तस्वीर दिखाई, तो दूसरी तरफ UAE, बहरीन और मोरक्को जैसे देशों की इजरायल के साथ कायम राजनयिक व्यवस्था और अजरबैजान की रणनीतिक साझेदारी भी सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम को गाजा युद्ध, इजरायल की सैन्य नीति और मध्य-पूर्व की बदलती कूटनीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। 

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