बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए हम अधिक से अधिक उत्पादन करें, यह हमारी नीतियों और अनुसंधान का उद्देश्य होना चाहिए। आज जल संरक्षण, जैविक खेती, प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग और सूक्ष्म सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है। यह बात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने बृहस्पतिवार को जीबी पंत कृषि विवि में आयोजित तीन दिनी 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कही। बृहस्पतिवार को गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व और सम्मान का क्षण है कि पंतनगर की भूमि इस आयोजन की साक्षी बनी है। यहां की पवित्र भूमि न केवल अन्न उत्पादन में समृद्ध है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की जड़ें भी कृषि से जुड़ी हुई हैं। किसानों की मेहनत और उनकी सहनशक्ति ने हमें खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। आज हमें जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की घटती उपलब्धता और आधुनिक तकनीकों के समावेश जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।इसलिए आज हमें अधिक उत्पादन के साथ ही सतत कृषि को अपनाने की जरूरत है। किसानों के मुद्दों का समय पर समाधान आवश्यक है। जब किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ होता है, तो अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। कृषि आधारित उद्योग, कृषि उपज आधारित उद्योग, कपड़ा, खाद्य तेल और कई अन्य उद्योग समृद्ध हो रहे हैं। इसलिए किसान भी आर्थिक रूप से मजबूत हों, इस दिशा में गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पंतनगर विवि ने हमेशा ही सराहनीय कार्य किया है, लेकिन, अब समय आ गया है जब कृषि विज्ञान को आधुनिक कृषि की आवश्यकताओं और देश की नई कृषि नीति के समरूप किया जाए। वह चाहते हैं कि पंतनगर विवि डिजिटल कृषि, जैविक व प्राकृतिक खेती पर कार्य करें। ग्रामीण समृद्धि के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है। इसी दृष्टिकोण से पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों को केंद्र में रखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व पहल की है। हाल ही में घोषित बजट कृषि और ग्रामीण विकास के प्रति इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।