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स्वयं सहायता समूह से आत्मनिर्भरता तक: करुणा की सफलता की प्रेरक कहानी

गदरपुर के शिवपुर गांव की रहने वाली करुणा कभी एक छोटे से आउटलेट पर नौकरी कर अपने परिवार का गुजारा करती थीं। सीमित आय में किसी तरह घर चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान नौकरी चले जाने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में उन्हें जय मां काली स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली, और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह से जुड़ने के बाद करुणा ने न सिर्फ सामूहिक बचत और वित्तीय प्रबंधन की समझ विकसित की, बल्कि वे आगे बढ़ते हुए प्रतिज्ञा ग्राम संगठन और फिर साहाकर क्लस्टर से भी जुड़ गईं। इसी दौरान ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) की टीम ने उन्हें व्यक्तिगत उद्यम योजना की जानकारी दी, जिसने उनके आत्मनिर्भर बनने के सपनों को दिशा दी। वर्ष 2020 में करुणा को अपना सिलाई- कढ़ाई का छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए ₹10,000 की रिवाल्विंग फंड सहायता प्रदान की गई। इसके बाद दो लाख रुपए के सीसीएल ऋण से उन्होंने अपने व्यापार का विस्तार किया। मेहनत और संकल्प के साथ उनका काम आगे बढ़ता रहा और फिर उन्हें सीआईएफ के माध्यम से 4.95 लाख रुपए की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिली। इस सहयोग ने उनके छोटे व्यवसाय को एक सशक्त उद्यम (बुटीक) में बदल दिया। आज करुणा का व्यापार एक बड़े स्वरूप में स्थापित हो चुका है और उनकी मासिक आय 50 हजार से 60 हजार तक पहुंच गई है। जो महिला कभी सीमित आय में संघर्ष कर रही थी, वहीं आज अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है और गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी।

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