स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल के 124 इंटर्न डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के पहले ही दिन आईपीडी, इमरजेंसी और वार्ड सेवाओं में इसका असर दिखाई दिया। मेडिसिन, सर्जरी, गायनी और बाल रोग समेत कई विभागों में मरीजों की जांच, निगरानी और इलाज से जुड़े कामों का अतिरिक्त दबाव जेआर और वरिष्ठ डॉक्टरों पर पड़ गया है। मेडिसिन विभाग, इमरजेंसी, सर्जरी, गायनी जैसे बड़े विभागों में प्रत्येक में 10-10 इंटर्न सेवाएं देते हैं। सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक सभी इंटर्न हड़ताल पर रहे। ऐसे में आईपीडी में मरीजों की जांच, वार्ड में मरीजों की निगरानी, आईवी चढ़ाने, मरीजों की केयर आदि कार्य में विभागों में परेशानी देखने को मिली। सोमवार को इन विभागों में हेल्पर हैंड नहीं होने से जेआर को डयूटी दी गई। हालांकि पैरामेडिकल स्टाफ यहां नहीं दिखाई दिया। मरीजों से जुड़े विभागीय कार्यों में भी दिक्कतें हुई। ईएनटी, ऑर्थो, नेत्र और बाल रोग विभाग में भी पांच से छह इंटर्न सेवाएं देते हैं, लेकिन यहां भी वरिष्ठ डॉक्टरों पर काम का दबाव रहा। इंटर्न के हाथों में तख्तियां थी, जिनमें काम का बोझ हक का सवाल, डयूटी लंबी मेहनत भारी, स्टाईपेंड बढ़ाना है जिम्मेदारी जैसे पोस्टर लिखे हुए थे। प्रदर्शन में डॉ. मो. शबाब, डाॅ. स्माईल मलिक, डाॅ. वैशाली पांडे, डॉ. योगेश, डॉ. प्रशांत यादव, डॉ. निर्मल सिंह, डॉ. अमीशा सचदेव आदि शामिल रहे। इंटर्न मो. शबाब ने बताया कि प्रोटेस्ट की प्रक्रिया मंगलवार को भी रहेगी, वे लोग जिला प्रशासन से धरने की अनुमति के लिए मंगलवार को भी जाएंगे। प्राचार्य ने चेताया- नहीं मिलेगा वेतन इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल शुरू होने से पहले प्राचार्य ने कुछ इंटर्न को अपने पास बुलाया और कहा कि उन्हें प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल मरीजों की सेवाओं के लिए है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हड़ताल के दौरान का वेतन आहरित नहीं होगा और सभी की अनुपस्थिति लगाई जाएगी। उन्होंने मंगलवार से अस्पताल परिसर में हड़ताल पर बैठने पर प्रशासन की मदद लेने की बात भी कही। इसके बाद इंटर्न स्वीकृति के लिए एसडीएम के पास भी गए लेकिन स्वीकृति की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। बाद में सभी बगैर स्वीकृति के धरने पर बैठ गए।