ट्रेड यूनियनों, राजनीतिक और मजूदर संगठनों ने मजदूर आंदोलन के बर्बर दमन के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया। मजदूरों पर दर्ज फर्जी मुकदमें रद्द करने की मांग के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सिडकुल में लंबे समय से उद्योगों में मजदूर वर्ग का भयावह शोषण उत्पीड़न, काम के लंबे दिन ने मजदूरों को आंदोलन की ओर धकेला है। उद्योगों में मालिक, प्रबंधन पहले से ही बेहद कमजोर श्रम कानूनों और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को भी रौंदते रहे हैं। न्यूनतम वेतन जो भुखमरी की रेखा को बताता है, वह भी मजदूरों को हासिल नहीं है। कहा कि आंदोलन के दबाव में सरकार ने न्यूनतम वेतन में मामूली बढ़ोतरी की, मगर, कंपनी मालिक और प्रबंधन इसे भी लागू नहीं कर रहे हैं। मजदूरों की मांग इस वेतन को लागू करने के साथ ही आज की महंगाई के अनुरूप 20 हजार करने की है। यह मांग वाजिब है। इसी अनुरूप बोनस आदि दिया जाना चाहिए। आंदोलन किसी के कहने-सुनने से नहीं भड़कता। आंदोलन की मूल वजह भयानक शोषण उत्पीड़न और नारकीय जीवन परिस्थितिया हैं। निश्चित तौर पर इसके लिए सरकार और सरकार की नीतियां जिम्मेदार है। जब तक ये परिस्थितया बनी रहेंगी, तब तक आंदोलन होते रहेंगे। जरूरी है कि इन परिस्थितियों को खत्म किया जाए।