मदन कौशिक पहली बार विश्वविद्यालय बनने के करीब दो दशक बाद ऋषिकुल कैंपस पहुंचे। उन्हें शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों ने लंबित वेतन की मांग उठाई, पीजी स्कॉलर ने स्टाइपेंड न मिलने की शिकायत की, जबकि छात्राओं ने शौचालय न होने की समस्या मंत्री के सामने रखी। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने संसाधनों की कमी और कार्य व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां बताईं। कैंपस में प्रवेश के बाद मंत्री करीब चार घंटे तक विभिन्न समस्याओं और शिकायतों को सुनते रहे। उन्होंने निरीक्षण से पहले आयुष सचिव, निदेशक, कुलपति समेत संबंधित अधिकारियों को मौके पर तलब किया और समस्याओं के समाधान की रूपरेखा तय की। मंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन जारी करने, मरीजों के लिए पर्याप्त दवाइयों की खरीद तथा भवनों की मरम्मत के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आयुष सचिव, निदेशक और कुलपति के बीच कई मुद्दों पर बहस भी देखने को मिली। शासन स्तर के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही की जानकारी भी मंत्री के सामने रखी। मदन कौशिक ने कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान उनकी प्राथमिकता है और लापरवाही बरतने वाले कई अधिकारियों को मौके पर ही फटकार लगाई गई।