समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ. सुभाष राजभर ने कहा कि युवाओं के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना छात्रों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया, युवतियों के साथ पुलिस ने अभद्रता की, जिसके बाद सरकार को दबाव में निर्णय लेना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इस पूरे प्रकरण में कई अनैतिक कदम उठाए हैं। डॉ. राजभर ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उनका आरोप था कि सरकार की नीयत साफ नहीं है, इसलिए उसकी नीतियां भी जनहित में नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया एंटी पेपर लीक बिल निष्पक्ष नहीं है और इसे बिना व्यापक चर्चा के लागू किया जा रहा है। उन्होंने संसद की कार्यवाही का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं, लेकिन सदन की अध्यक्षता कर रहे लोग संबंधित नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार यह संसदीय परंपराओं के विपरीत है। सपा नेता ने भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हुए युवा आंदोलन के दौरान हालात ऐसे बन गए थे कि वहां सुरक्षा बलों की भारी तैनाती करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार जनभावनाओं को समझने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। डॉ. राजभर ने कहा कि देश में पेपर लीक की समस्या का समाधान केवल कठोर कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने से होगा। उनका कहना था कि एंटी पेपर लीक बिल की आवश्यकता से अधिक जरूरत निष्पक्ष और जवाबदेह व्यवस्था की है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है और सरकार की नीतियों में भी कई खामियां हैं। उन्होंने कहा कि जिस एंटी पेपर लीक बिल को सरकार समाधान बता रही है, उसी में कई "छेद" हैं। सपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इसे विपक्ष से पर्याप्त चर्चा और सुझाव लिए बिना लाया गया है।