काशी के गंगा घाट के किनारे तंग गलियों में आत्मवीरेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ की आत्मा यहीं बसती है, इसलिए इसका नाम आत्मवीरेश्वर महादेव है। काशी के पंचमुद्रा पीठ पर सिंधिया घाट के पास भगवान शिव अग्नि के रूप में विराजमान हैं। भगवान वीरेश्वर के समान सिद्धि और शीघ्र ही धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष का प्रदान करने वाला दूसरा शिवलिंग नहीं है। इसे धरती का सबसे प्राचीन शिवलिंग भी माना जाता है।