लाटभैरव की अतिप्राचीन रामलीला की गुरुवार को गणपति पूजन, पंचस्वरूपों के पूजन व मुकुट पूजन के साथ शुरूआत हुई। संध्या काल आश्विन कृष्ण नवमी के मान के तहत विशेश्वरगंज स्थित रामलीला स्थल अयोध्या पर विघ्नहर्ता की वैदिक मंत्रों के बीच पूजा आराधना की गई। झाल-मंजीरा और मृदंग की थाप गूंजी और रामायणी दल ने 'गाइये गणपति जग वंदन के साथ मानस के प्रसंगों में पगे दोहों का गायन शुरू कर दिया। पहले दिन श्रीगणेश के तौर पर सात दोहों को स्वर दिए। प्रमुख पंचस्वरूपों का वरण किया गया। नवग्रह, हनुमान जी के मुखौटे, मानस संवाद पोथी व रामलीला के दौरान उपयोग में ले आए जाने वाले साजो सामान और रामायणी दल के मृदंग का भी पूजन किया गया। रामलीला के प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैया लाल यादव यजमान थे। गणपति देव की आरती उतारी गई और लीला प्रेमियों में सारिणी का वितरण किया गया। पुरोहित के रूप में व्यास दयाशंकर त्रिपाठी के आचार्यत्व में ब्राम्हणों के समूह ने सस्वर मंत्रों के बीच पूजन अनुष्ठान कराए।