देवों के दीपोत्सव के महापर्व देव दीपावली पर शुक्रवार को हरिश्चंद्र व मणिकर्णिका घाट पर धधकती चिताओं के बीच दीपों की लड़ियां सजीं। एक ओर जहां झिलमिलाती दीपों की रोशनी से देवगण हर्षित, पुलकित हो रहे थे, वहीं कई जिंदगियां जलती चिताओं पर जीवन यात्रा को विराम दे रही थीं। देव उत्सव में हर तरह रोशनी बिखर रही थी। हर कोई इस उत्सव में शिरकत कर अपने को अह्लादित, आनंदित हो रहा था तो देवगण भी आशीष की वर्षा कर रहे थे। मगर दीपों के बीच धधकती चिताएं मानो देवगणों से मुक्तिधाम की गुहार लगा रही हों। दोनों घाटों पर शवों के आने का सिलसिला चलता रहा तो घाट की सीढि़यों पर दीप मालाएं मुक्तभाव से इठलाती नजर आईं। वहीं, लोगबाग अविरल गंगा की तरह प्रवाहमान होते रहे।