काशी में कहा जाता है बाबा बाबा सब कहे माई कहे न कोई ।बाबा के दरबार में माई कहे सो होई। बाबा विश्वनाथ की नगरी में उनका प्रसाद महिलाओं को सशक्त करने का माध्यम बन रहा है । कबीरचौरा स्थित बनने वाले प्रसाद की भोगशाला में अस्सी प्रतिशत महिलांए काम करती हैं और शुद्धता को अपनाकर प्रसाद को बनाती हैं इनके की इस के बदले इन्हें महीने में पांच से छ: हजार की आमदनी होती है जिससे ये खुद स्वावलंबी बन रही हैं और अपने घर के खर्च में योगदान कर हैं। प्रसाद को व्यवस्थित करने वाली सुशीला देवी बता रही हैं कि पहले भी ये काम करती थी लेकिन आमदनी ठीक नहीं थी लेकिन जबसे प्रसाद बना रही हैं अब इनकी आमदनी ठीक है । ममता भी अपने बदले दिनों पर उत्साह प्रकट कर रही हैं।रेखा साहनी भी प्रसाद के निर्माण के साथ ही अपनी बदली हुई जिंदगी सशक्त जीवन को बता रही हैं।