मेरा बस चले तो मैं बनारस में ही बस जाऊं। यहां आकर जो प्यार, सुकून और आशीर्वाद मिलता है उसका कोई जवाब नहीं है। इसलिए यहां बार-बार आने का मन करता है। बनारस का कोई जवाब ही नहीं है। संकटमोचन के मंच पर प्रस्तुति देना तो हर कलाकार की ख्वाहिश होती है। यह कहना है शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खां के पुत्र अरमान खान का।