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पराली और गेहूं के डंठल से बनेगी बायोचार खाद, यूरिया से मिलेगी मुक्ति; VIDEO

Aman Vishwakarma Updated Mon, 23 Mar 2026 10:25 PM IST

किसानों के लिए अच्छी ख़बर है। अब पराली, सरसों, गेहूं फसल के सूखे डंठल, सरपत आदि से ''बायो-चार'' (देशी खाद) बनेगी। यह खाद अन्नदाताओं के लिए बरदान साबित हो सकती है। बायोचार (जैविक खाद) के प्रयोग से मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों की कमी पूरी होगी। इसका फायदा यह होगा कि खेतों में यूरिया खाद नहीं डालना पड़ेगा। श्री सीता समाहित स्थल ट्रस्ट की ओर से सोमवार को बायोचार बनाने का विधिवत ट्रायल किया गया। खास बात यह है कि किसानों को बायोचार बनाने के लिए ट्रेनिंग भी मिलेगी। जिसका फायदा यह होगा कि किसानों को अब फसलों के पराली, डंठल, आदि को जलाना नहीं पड़ेगा। इस साधारण प्रोजेक्ट की तकनीकी स्विट्जरलैंड की है। प्रोजेक्ट की शुरूआत कराने वाले महाराष्ट्र के गौतम का कहना है कि बायोचार से तीन समस्याएं सुलझती हैं। कहा मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी है, बायोचार से मिट्टी की क्षमता बढ़ेगी और धरती का पोषण होगा। बताया कि बायोचार पद्धति में फसलों के अनुपयुक्त डंठल, पराली आदि को बिना ऑक्सिजन के जला कर शुद्ध कार्बन यानी कोयला बना कर उसमें गोबर और कंपोस्ट मिला कर जैविक खाद बनाते है। यह खाद बहुत ही उपयोगी और अच्छी होती है। पुंज स्कूल की डायरेक्टर डॉ. चित्रा सिंह का कहना है कि संस्था के चेयरमैन पं. अतुल पुंज की मंशा है कि यहां के ग्रामीणों और किसानों का विकास हो और लोग आत्मनिर्भर बने। कहा बायोचार (जैविक खाद) से धरती का कार्बन लेबल बढ़ जाता है। मौके पर प्रिंसिपल एस जयबीर शर्मा, प्रबंधक कैलाश चंद्र, अशोक सिंह, धर्मेंद्र सिंह आदि रहे।

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