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बाघ व जंगली जानवरों की आमद से ग्रामीण खौफजदा, लाठी-डंडे लेकर ग्रुप में चल रहे ग्रामीण

सीतापुर में अलग-अलग हिस्सों में बाघ व अन्य जंगली जानवरों की आमद ग्रामीण व किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनी है। लहरपुर, मछरेहटा, झरेरखापुर, महोली, पिसावां आदि क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से बाघ व तेंदुआ की चहलकदमी रही है। बाघ द्वारा कई पशुओं का शिकार भी किया जा चुका है। यही नहीं कई बार किसानों द्वारा खेतों में बाघ को देखा गया है। सबसे अधिक प्रभावित महोली वन क्षेत्र के गांव हैं। यहां पिछले चार दिनों से बाघ विचरण कर रहा है। विभाग का मानना है कि जिले में 6 बाघ विचरण कर रहे हैं। इनमें से कुछ महीने पहले लहरपुर में एक बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया था। मछरेहटा इलाके में एक बाघ का शव भी पाया जा चुका है। एक सप्ताह पूर्व महोली क्षेत्र के गांव पिपरझला निवासी संजय की पुत्री मोहिनी बकरी चराने गई थी। जहां बाघ ने बकरी का शिकार किया था। वहीं इसके दूसरे दिन गांव के कुलदीप वाजपेई के पशुबाड़े के पास बाघ के पगचिन्ह मिले थे। मंगलवार को मिर्जापुर गांव के उत्तर बाघ देखा गया था। बुधवार को पिपरझला निवासी किसान गोकरन ने गन्ने के खेत में बाघ देखने का दावा किया था। इसके बाद सूचना पर गांव वाले वहां पहुंचे, तब तक बाघ जा चुका था लेकिन उसके ताजा पगचिन्ह मिले थे। विभाग ने भी बाघ के पगचिन्ह बताए थे। वहीं पिसावां इलाके के प्रेमपुर गांव में बुधवार की रात गांव के बाहर बने घर से पालतू कुत्ते को तेंदुआ उठा ले गया। जहां वन विभाग के अधिकारियों ने पिंजरा लगाने की बात कही है। एक ओर जहां महोली वन रेंज में बाघ और तेंदुआ की दहशत से ग्रामीण परेशान हैं। लगातार एक सप्ताह से ग्रामीण लाठी डंडे लेकर चल रहे हैं। वहीं विभाग द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

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