शामली। कांवड़ यात्रा के दौरान शामली में आस्था के साथ सेवा और मेहमाननवाजी की अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है। शिवरात्रि से करीब चार दिन पहले ही बनत, शामली और कैराना के कांवड़ मार्गों पर एक हजार से अधिक परिवार अपने घरों के दरवाजे शिवभक्तों के लिए खोल देते हैं। यहां कांवड़िए सिर्फ राहगीर नहीं रहते, बल्कि परिवार के मेहमान बन जाते हैं। कोई शिवभक्तों के लिए भोजन तैयार करता है तो कोई दूध, फल और नाश्ता उपलब्ध कराता है। कई परिवार रात में कांवड़ियों के ठहरने और आराम की व्यवस्था भी अपने घरों में करते हैं। बच्चे से बुजुर्ग तक सेवा में जुटे कांवड़ियों की सेवा में घर का हर सदस्य अपनी भूमिका निभाता है। महिलाएं अपने हाथों से पकवान और नाश्ता तैयार करती हैं, बच्चे पानी और दूध लेकर पहुंचते हैं, जबकि बुजुर्ग कांवड़ियों से कुछ देर आराम करने और भोजन करने का आग्रह करते नजर आते हैं। बनत निवासी ठेकेदार आशु पिछले दो दिनों से अपने घर के बाहर शिवभक्तों के लिए भंडारा चला रहे हैं। उनकी पत्नी घर पर बनाए पेड़े और दूध कांवड़ियों को बांट रही हैं, वहीं बच्चे भी सेवा में हाथ बंटा रहे हैं। आशु का कहना है कि कांवड़ियों की सेवा उनके लिए केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और खुशी का विषय है। वर्षों से चली आ रही सेवा की परंपरा स्थानीय लोगों के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के दौरान घरों के दरवाजे खोलकर शिवभक्तों की सेवा करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। भोजन, पानी, नाश्ता और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में परिवार कोई कमी नहीं छोड़ते। यही वजह है कि हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान बनत से कैराना तक सड़क किनारे बने घर सेवा और मेहमाननवाजी के केंद्र बन जाते हैं। आस्था से जुड़ी यह तस्वीर कांवड़ यात्रा के माहौल को और खास बना देती है।