दिल्ली में हुए विस्फोट मामले की जांच यूपी के रामपुर तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार देर रात उत्तराखंड के हल्द्वानी और नैनीताल स्थित मस्जिदों से दो मौलवियों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों की मूल निवासी रामपुर जिले के दढ़ियाल क्षेत्र से है। बताया जा रहा है कि दिल्ली विस्फोट में शामिल फिदायीन आतंकी डॉ. उमर नबी के मोबाइल की कॉल डिटेल से रामपुर कनेक्शन उजागर होने पर एनआईए व सुरक्षा एजेंसियां पिछले तीन दिनों से जिले में सक्रिय हैं। टीम टांडा, दढ़ियाल और शाहबाद क्षेत्र में संदिग्ध ठिकानों पर नजर रखे हुए है।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित बिलाल मस्जिद के मौलवी मोहम्मद आसिम कासमी को एनआईए ने हिरासत में लिया है, जबकि नैनीताल मस्जिद के मौलाना नईम से पूछताछ की जा रही है। दोनों मूल रूप से रामपुर के दढ़ियाल क्षेत्र के रहने वाले हैं। हालांकि एनआईए ने अब तक रामपुर में कोई गिरफ्तारी नहीं की है।
मौलवी के परिवार का बैकग्राउंड
परिवार के अनुसार, मौलवी मोहम्मद आसिम चार भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। उनका परिवार वर्षों से मदरसों में अध्यापन से जुड़ा है। पिता और तीनों भाई भी अलग-अलग मदरसों में पढ़ाते हैं। करीब 15 वर्ष पहले मोहम्मद आसिम दढ़ियाल छोड़कर हल्द्वानी में बस गए थे। उनकी 10 साल पहले शादी हुई थी और उनके पांच बच्चे—दो बेटे और तीन बेटियां—हैं। परिजनों का दावा है कि उनके घर पर एनआईए की कोई पूछताछ या दबिश नहीं हुई।
टांडा क्षेत्र पहले भी रहा है सुर्खियों में
टांडा तहसील का नाम इससे पहले भी कई संवेदनशील मामलों में सामने आ चुका है। मई 2025 में मोहल्ला आज़ादनगर निवासी शहजाद को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान एनआईए ने टांडा स्थित उसके घर से कई दस्तावेज कब्जे में लिए थे। इसी तरह अगस्त 2021 में धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में गुजरात पुलिस ने टांडा में कार्रवाई की थी, जिसके बाद यूपी एटीएस ने भी आरोपी युवक से पूछताछ की थी।
इन पूर्व मामलों के कारण अब दढ़ियाल निवासी मौलाना मोहम्मद आसिम कासमी को हिरासत में लिए जाने के बाद एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की नजरें टांडा इलाके पर टिक गई हैं। वहीं, रामपुर पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र ने जांच से जुड़े किसी भी बिंदु पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।