जिला अस्पताल में बाहर की दवाओं की खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को अपर निदेशक (चिकित्सा स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. जीपी गुप्ता ने ओपीडी में तीन डॉक्टरों को बाहर की दवा लिखते रंगे हाथ पकड़ लिया। ओपीडी कक्ष में ही दवा की पर्चियां सीएमएस को दिखाते हुए कई सवाल किए। अधिकारी व चिकित्सक जवाब नहीं दे पाए। अपर निदेशक ने संबंधित चिकित्सकों को निलंबन की चेतावनी दी। ओपीडी के बाद डॉक्टरों की जमकर क्लास लेते हुए मरीजों को अस्पताल की दवाएं लिखने के निर्देश दिए। मंगलवार को पूर्वान्ह करीब 11.45 बजे अपर निदेशक अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए। इसकी भनक किसी को नहीं लगी। हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे तो चिकित्सक एक मरीज को बाहर से खरीदने के लिए दवा की परची थमा रहे थे। अस्पताल का परचा और बाहर की दवा की परची को पकड़ने के बाद उन्होंने सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार को दिखाते हुए अल्टीमेटम दिया। उन्होंने सीएमएस को इस पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए। इसके बाद वे मेडिसिन विभाग की ओपीडी पहुंचे तो यहां भी चिकित्सक मरीज को बाहर की दवा परची देते हुए पकडे़ गए। अपर निदेश के पूछने पर चिकित्सक ने जवाब दिया कि जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए दवा लिखी है। अपर निदेशक ने कहा कि अस्पताल के परचे पर क्यों यह दवा नहीं मिली। डॉक्टर अपने की जवाब में फंस गए और चुप्पी साध ली। बाद में उन्होंने सभी चिकित्सकों की बैठक करके क्लास ली। दोबारा बाहर की दवा खरीदने के लिए परची मरीजों के पास मिली तो निलंबित किए जाने की चेतावनी दी। अपर निदेशक ने 11 जनवरी को इमरजेंसी में पकडे़ थे इंजेक्शन अपर निदेशक ने बीती 11 जनवरी को जिला अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया था। डस्टविन में बाहर से मंगवाए महंगे इंजेक्शनों की शीशियां पकड़ी थी। कई मरीजों के पास से भी इंजेक्शन बरामद किए थे। मामले में जांच कमेटी पड़ताल कर रही है। इस मामले की सूचना अपर निदेशक शासन को दे चुके हैं। इमरजेंसी में निरीक्षण के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को ओपीडी में भी खेल को पकड़ लिया।