रायबरेली में विद्युत उपकेंद्र खीरो क्षेत्र की एक लाख की आबादी को शनिवार को भी अंधेरे से छुटकारा नहीं मिला सका। शासन की तरफ से ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि, जर्जर लाइनों की मरम्मत, लंबी लाइनों वाले फीडरों में नई लाइन बनाकर दो भागों में विभाजित करने के नाम पर करोड़ों रुपये की योजनाएं स्वीकृत होने के बाद उपभोक्ताओं को उम्मीद जगी। लेकिन, कहीं भी कार्य पूरा नहीं हो सका है। विद्युत उपकेंद्र खीरो से निकले अजीतपुर से जुड़े उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए छह महीने पहले दूसरा फीडर बनकर तैयार हो गया था। लेकिन, इस पर अब तक लोड नहीं डाला गया। इससे उपभोक्ता लो वोल्टेज और ट्रिपिंग से जूझ रहे हैं। उपभोक्ता राजकुमार, राजेश कुमार, संजय, पप्पू आदि का कहना है कि अजीतपुर फीडर की 20 हजार आबादी के पांच हजार उपभोक्ताओं की आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए उसे दो भाग में विभाजित करने के लिए एक करोड़ रुपये की लागत से 11 किमी लंबे बनईमऊ फीडर को बने एक साल हो चुके हैं। नए फीडर से रायपुर, मेरुई, गौनहा बरी, मेरुई, पूरे संभर सिंह, पूरे विजयी सिंह, गरीब सिंह का पुरवा व बैसन का पुरवा आदि गांव जोड़े जाएंगे। जबकि शेष गांव मथुरा खेड़ा, फिरोजाबाद, सलीमापुर, दुकनहा, अहिलवा, अचाकापुर, नुनैरा, सेवनपुर, अकोहरिया, अजीतपुर, जमकोरियापुर व टिकवामऊ आदि को अजीतपुर फीडर से बिजली मिलती रहेगी। अजीतपुर फीडर को दो भागों में विभाजित करने से बार बार ट्रिपिंग व लो वोल्टेज की समस्या दूर हो जाती। लेकिन, नए फीडर के लाइन बनने के एक साल बाद भी नहीं चलाए जाने से 20 हजार की आबादी ट्रिपिंग व लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रही है।