सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अब दवाओं और उपचार के साथ संवेदनशील व्यवहार भी मिल सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहल की है। मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ दुर्व्यवहार तथा उपेक्षा की शिकायतों के बीच विभाग चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को करुणामयी देखभाल का पाठ पढ़ा रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर मरीजों के प्रति सहानुभूति, सम्मान और संवेदनशीलता का भाव अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज के साथ मधुर व्यवहार किया जाना चाहिए। मरीज की बात ध्यान से सुनने, उसकी परेशानी को समझने और उपचार के दौरान उसे सम्मान देने से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ता है। विशेषकर गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ धैर्य एवं संवेदनशीलता से पेश आना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को यह समझाना है कि मरीजों की देखभाल केवल दवा देने और उपचार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके साथ मानवीय व्यवहार करना भी स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को प्रशिक्षण में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया। जो कर्मचारी किसी कारणवश प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो सके, उन्होंने मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया।