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व्यापारियों ने प्रमुख दलहन में आयात शुल्क लागू किए जाने की मांग उठाई, प्रदर्शन किया

भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र की अगुवाई में मंगलवार को व्यापारियों ने नौबस्ता गल्ला मंडी के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन ई-मेल के जरिए भेजा गया। इसमें देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बेहतर नीति बनाने और सभी प्रमुख आयतित दलहन में 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की मांग उठाई गई। व्यापारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल और घर-घर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया है। हालांकि दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां और लानी होंगी। वित्तीय प्रोत्साहन और मूल्य संरक्षण देने की आवश्यकता है। शुल्क-मुक्त (जीरो ड्यूटी) आयात नीति से घरेलू बाजार में विदेशी दालों की भरमार हो गई है। और भारतीय किसान अपने उत्पाद को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी कम दाम पर बेचने को विवश हैं। राष्ट्रीय महामंत्री बनवारी लाल गुप्ता ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य न मिलने के कारण अरहर और अन्य दलहनों की बुवाई का रकबा प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में घट रहा है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति को गहरा आघात पहुँचेगा। कानपुर की नौबस्ता गल्ला मंडी से इस अभियान की शुरुआत हो रही है। उत्तर प्रदेश समेत देश की सभी प्रमुख ग़ल्ला मंडियों में इसी तरह के ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजे जाएंगे। इस मौके पर अजय बाजपेई, केके गुप्ता, नीरज शुक्ला, गोपाल शुक्ला, रजत गुप्ता, विजय किशोर गुप्ता, श्यामजी गुप्ता, शिवकुमार गुप्ता, गोपाल वर्मा, आनंद मिश्र, अनुज त्रिपाठी, मनोज द्विवेदी,अनीश शुक्ला, नितिन त्रिवेदी,राजकुमार जायसवाल, संदीप तिवारी,आशू गुप्ता,अजय गुप्ता आदि थे।

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