भीतरगांव कस्बे में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सुप्रशिद्ध कथा व्यास प्रशांत भूषण ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा जब इंद्र को अपनी शक्तियों पर अभिमान हो गया, ब्रजवासियों को डराने के लिए मूसलाधार वर्षा की, तब नन्हे कन्हैया ने अपनी नन्हीं कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिनों तक ब्रज की रक्षा की। परमात्मा केवल प्रेम-समर्पण के भूखे, आडंबर के नहीं। यह लीला केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि अहंकार की हार और भक्ति की जीत का प्रतीक है।