पारस हेल्थ कानपुर ने गंभीर हृदय रोगियों के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बिना छाती खोले एओर्टिक वाॅल्व बदलने की अत्याधुनिक ''टावी'' (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन) प्रक्रिया की शुरुआत हुई है। वरिष्ठ इंटरवेन्शनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. श्रीपद खैरनार के नेतृत्व में जोखिम वाली श्रेणी के तीन बुजुर्ग व गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। इन मरीजों में फेफड़ों की बीमारी (सीओपीडी) से पीड़ित वृद्ध, 85 वर्षीय अत्यधिक कमजोर महिला तथा नियमित डायलिसिस पर निर्भर गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित मरीज शामिल थे। इनके हृदय का वॉल्व खराब था। इन रोगियों की ओपन हार्ट सर्जरी में खतरा हो सकता था। इस विधि में पैर की धमनी के जरिये पतली कैथेटर नली से नया कृत्रिम वाॅल्व स्थापित किया गया। इसमें दर्द कम होता है और मरीज जल्दी रिकवर होकर डिस्चार्ज हो जाता है। डॉ. श्रीपद खैरनार ने बताया कि उम्र अधिक होना इलाज से इन्कार का कारण नहीं होना चाहिए। अक्सर सांस फूलने या थकान को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि यह हृदय रोग हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ एओर्टिक वाॅल्व पर कैल्शियम जमने से वाल्व संकरा हो जाता है जिससे शरीर में पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं हो पाता। इससे सांस फूलना, सीने में दर्द, थकान और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखते हैं। पारस हेल्थ में टावी सुविधा उपलब्ध होने से अब स्थानीय मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।