भीतरगांव कस्बे में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास प्रशांत भूषण महाराज ने भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का सुंदर प्रसंग सुनाया। महाराज ने बताया कि रुक्मणी का प्रेम निश्छल था, जिसके कारण स्वयं भगवान को उन्हें अपनाने आना पड़ा। कथा के दौरान रुक्मणी विवाह की जीवंत झांकी सजाई गई, जिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। मंगल गीतों और फूलों की वर्षा के बीच पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। महाराज ने विस्तार से समझाया कि कैसे भक्ति और समर्पण से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।