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जर्जर भवन के तीन कमरों व छोटे आंगन में चल रहीं 10वीं तक की कक्षाएं

एपीवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दर्शनपुरवा में प्रवेश के दौरान लगता है कि आप किसी पुराने किले में दाखिल हो रहे हैं। खड़ी सीढि़यों से जब ऊपर कक्षा तक पहुंचे तो नजारा हतप्रभ करने वाला था। छोटा सा आंगन और उससे सटे तीन कमरे। इन्हीं में कक्षाएं एक से 10 तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। यहां हल्की रोशनी में शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ा रही थीं।विद्यालय में कुल 43 बच्चे हैं जिसमें सर्वाधिक 13 बच्चे कक्षा पांच में हैं। भवन काफी जर्जर होने के चलते 10 शिक्षक, एक प्रधानाचार्य और अन्य कर्मचारी रोजाना ईश्वर का नाम लेकर ही स्कूल में दाखिल होते हैं। स्कूल का आगे का हिस्सा गिर चुका है, कमरों में भी कई बार प्लास्टर गिरा है। दाखिला कराने आने वाले अभिभावक अगर थोड़े भी सक्षम हैं तो स्कूल की हालत देखकर उल्टे पैर लौट जाते हैं। करीब 10 सालों से प्रधानाचार्य लगातार पत्राचार कर रही हैं, लेकिन अधिकारियों के कानों में जूं नहीं रेंग रही है।

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