मालवीय नगर स्थित रामलीला मैदान में मंगलवार शाम छह बजे राम और रावण की सेनाएं आमने-सामने थीं। दोनों ओर से एक-दूसरे पर बाणों की बौछार हो रही थी। भगवान राम ने अपने तरकश से रावण पर कई बाण चलाए, लेकिन हर बार उसका सिर कटने के बाद फिर जुड़ जाता। रावण की अट्टहास से मैदान गूंज उठता। इसी बीच विभीषण ने भगवान राम को रावण की नाभि में अमृत होने का रहस्य बताया। इसके बाद राम ने रावण की नाभि पर बाण चलाया। बाण लगते ही रावण धराशायी हो गया। इसके साथ ही पूरा रामलीला मैदान जयश्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। विजयदशमी के अवसर पर मंगलवार शाम रामलीला मैदान में रावण दहन का आयोजन किया गया। रावण के अंत के साथ ही लोगों ने असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव मनाया। मैदान में मौजूद लोगों ने जयश्रीराम के जयकारे लगाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। विजयदशमी का पर्व पंतनगर, धानेपुर, करनैलगंज सहित जिले के अन्य स्थानों पर भी उल्लास के साथ मनाया गया। जगह-जगह रामलीला के मंचन और रावण दहन के आयोजन हुए। लोगों ने भगवान राम के आदर्शों को याद करते हुए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।