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Video: गोंडा में 17 महीने में 1.53 करोड़ वेतन निकला, मेडिकल कॉलेज में नहीं गूंजी एक भी किलकारी

जिले के मेडिकल कॉलेज में मातृत्व एवं प्रसूति विभाग शुरू होने के 17 महीने बाद भी एक भी प्रसव नहीं कराया जा सका है। विभाग में सात डॉक्टरों और आधा दर्जन इंटर्न की तैनाती होने के बावजूद न तो नॉर्मल डिलीवरी की व्यवस्था शुरू हो सकी है और न ही सीजर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हो पाई है। इस दौरान विभाग में कार्यरत चिकित्सकों और स्टाफ को करीब 1.53 करोड़ रुपये वेतन के रूप में भुगतान किया जा चुका है। दिसंबर 2024 में बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार के साथ मेडिकल कॉलेज में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की शुरुआत की गई थी। उम्मीद जताई गई थी कि जिले की महिलाओं को बेहतर मातृत्व सेवाएं मिल सकेंगी और उन्हें निजी अस्पतालों या दूसरे जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन विभाग शुरू होने के बाद से अब तक एक भी महिला का प्रसव नहीं कराया जा सका है। विभाग में सात डॉक्टरों के साथ इंटर्न और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद प्रसव संबंधी आवश्यक संसाधन, ऑपरेशन थिएटर की पूरी व्यवस्था और जरूरी उपकरण अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो सके हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक जांच के बाद जिला महिला अस्पताल या निजी अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ और परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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