गोंडा में पितृ विसर्जन अमावस्या पर सरयू नदी के घाटों पर तड़के से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने सरयू में डुबकी लगाकर स्नान-ध्यान, पूजा-पाठ किया। घाटों पर ही दान-पुण्य करके अपने पितरों को विदाई दी। पं. देवनारायन पांडेय ने इसकी महत्ता को बताते हुए कहा कि अमावस्या पितृ विसर्जन के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर अपने पितरों को तर्पण कर जलांजलि देते हैं। इसमें तीन प्रकार के तर्पण ऋषि तर्पण, देव तर्पण व पितृ तर्पण देकर लोग अपने पितरों को तृप्त कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पितृ पक्ष में पितरों को तर्पण देने के बाद उन्हें स्मरण कर पावित्री, मोदक, त्रिकुशा व यज्ञोपवीत (जनेऊ) को नदी की धारा में प्रवाहित कर उन्हें विदाई देते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। करनैलगंज के सरयू घाट, भौरीगंज स्थित सरयू नदी, त्रिमुहानी घाट सूकरखेत पसका, जम्बू तीर्थ व बरुहा सहित सरयू नदी घाटों पर सुबह भोर से ही पितृ विसर्जन के लिए स्नान ध्यान, पूजा पाठ के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।