वर्ष 2022 में बड़े-बड़े दावे और प्रचार के साथ शुरू किए गए स्कूल चलो अभियान की हकीकत अब सरकारी दावों की पोल खोल रही है। जिले के दो जनप्रतिनिधियों और करीब 99 अधिकारियों ने 101 परिषदीय विद्यालयों को गोद लेकर उन्हें मॉडल स्कूल बनाने का वादा किया था, लेकिन चार वर्ष बाद भी अधिकांश विद्यालय बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कहीं बाउंड्रीवाल नहीं है, कहीं जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बने हैं तो कहीं पानी और साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं हो सकी है।