चंदौली जनपद के चकिया क्षेत्र में पत्थर तोड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले हजारों मजदूरों को कुछ समाजवादी पार्टी नेताओं द्वारा "खनन माफिया" कहे जाने पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कड़ी आपत्ति जताई है। माकपा जिला कमेटी के सचिव शंभूनाथ सिंह ने इसे मेहनतकश मजदूरों का अपमान बताते हुए संबंधित नेताओं से बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। शंभूनाथ सिंह ने कहा कि चकिया और नौगढ़ क्षेत्र के हजारों श्रमिक वर्षों से पत्थर तोड़ने, गिट्टी बनाने और खदानों में मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ये मजदूर अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे श्रमिकों को खनन माफिया कहना न केवल उनकी मेहनत का अपमान है, बल्कि उनके सम्मान और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन और उसमें संलिप्त बड़े माफिया तत्वों तथा रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों के बीच स्पष्ट अंतर है। मजदूरों को माफिया की संज्ञा देना सामाजिक न्याय और श्रमिक सम्मान की भावना के विपरीत है। माकपा हमेशा श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है और भविष्य में भी करती रहेगी। माकपा नेता ने कहा कि यदि किसी नेता को अवैध खनन पर आपत्ति है तो उसे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग करनी चाहिए, लेकिन निर्दोष मजदूरों को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की बयानबाजी बंद नहीं हुई तो पार्टी मजदूरों के साथ व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी। शंभूनाथ सिंह ने कहा कि पत्थर उद्योग से जुड़े श्रमिकों के सामने पहले ही रोजगार, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी गंभीर समस्याएं हैं। ऐसे में उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मेहनतकश मजदूरों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं और उनके सम्मान की रक्षा करें।