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उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का किया पारण, VIDEO

Aman Vishwakarma Updated Wed, 25 Mar 2026 05:51 PM IST

चैती छठ के चौथे दिन बुधवार की सुबह व्रतियों ने सरोवर तट पर पहुंच कर उदयाचल सूर्य को अर्घ्य दिया और निराजल व्रत का पारण किया। यही नहीं महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अचल सुहाग की कामना की। इस दौरान घाटों पर उगीं न सुरूज मल भइले अरग के बेर, अन धन मांगिला आदि गीत गुंजायमान रहे। चार दिवसीय चैती छठ की शुरूआत रविवार को हुई थी। तीसरे दिन मंगलवार को व्रतियों ने अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया। वहां से घर पहुंच कर पूरी रात उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी की गई। सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पकवान आदि तैयार किए गए। भोर में व्रती महिलाओं ने अर्घ्य के लिए दउरी और सूप में फल, पकवान, पूजा सामग्री आदि को सजाया। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य नए कपड़े पहन कर तैयार हो गए। इसके बाद व्रती महिलाएं हाथों में कलश लेकर चलीं। पुरुष सदस्य सिर पर फल और पूजन सामग्री वाले सूप और दउरी लेकर चले। नगर के मालगोदाम पोखरा, मानसरोवर तालाब, दामोदरदास पोखरा सहित अन्य घाटों पर व्रती पहुंचे। यहां कलश स्थापित कर पूजा अर्चना की। इसके बाद सूर्य के उदय होने का इंतजार किया। आसमान में सूर्य की लालिमा दिखने पर व्रतियों ने दूध और जल से भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। इस दौरान अर्घ्य दिलाने के लिए स्वयं सेवी संगठनों ने दूध की व्यवस्था की थी। पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगातार सदा सुहागन रहने की कामना की। इसके बाद व्रतियों ने जल पीकर 36 घंटे के उपवास का पारण किया। कुछ व्रति ढोल नगाड़े और बैंड बाजा के साथ सरोवर तटों तक पहुंचे थे। वहीं सरोवर तटों पर छठ मइया के गीत गूंजते रहे।

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