महिलाओं की स्थिति में लगातार बदलाव आ रहा है। महिलाएं सशक्त होकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा क्षेत्र में भी उन्हें पुरुषों से दो कदम आगे आना होगा। अपनी सुरक्षा के लिए वह किसी दूसरों पर निर्भर न रहें और निडर होकर रह सकें। कुछ ऐसा ही कहना था महिला थाना प्रभारी कल्पना मिश्रा का। महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण विषय पर अमर उजाला फाउंडेशन द्वार बुधवार को शंकरपुर स्थित शांति अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम में छात्राओं व शिक्षिकाओं ने खुलकर विचार रखा। किसी ने सरकार की ओर से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा तो किसी ने शिक्षा और जागरुकता के बल पर महिलाओं के आगे बढ़ने की बात कही। उपनिरीक्षक कल्पना मिश्रा ने कहा कि सरकार लगातार महिलाओं को आगे लाने का प्रयास कर रही है। सुरक्षा को लेकर तमाम जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका व्यापक असर भी दिख रहा है, लेकिन महिलाओं को भी खुद की सोच बदलनी होगी। खुद को कमजोर और परंपराओं में बंध कर चलने की बजाय नए बदलावों को स्वीकार करें। सुरक्षा को लेकर तमाम हेल्पलाइन नंंबर मौजूद है। किसी भी परेशानी पर डायल-112 पर फोन करें वह आप तक आठ मिनट के अंदर पहुंचकर सहायता उपलब्ध करा रही है। पहले लड़कियों को घूमने पर घर में पाबंदी लगाई जाती थी और लड़कों पर कोई बंदीश नहीं थी। आज बेटियां लड़कों से हर क्षेत्र में एक कदम आगे हैं। हम लोग को अपने लड़कों को बेटियों को सम्मान देने की शिक्षा देनी है। तमाम नए कानूनों के बाद भी समाज में बढ़ रही महिला हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए शिक्षिका नांजनीन व सरोज ने कहा कि घर-परिवार में बेटियाें को शुरू से ही ऐसा माहौल देने की जरूरत है, जिससे वह अन्याय का खुलकर प्रतिकार करें। चुप न रहें। संवाद में खुश्बू यादव, पूनम कुमारी, प्रीति पांडेय, सरिता चौहान, नजीश परवीन, निशु शाह, खुशी उपाध्याय, निधी, मुस्कान खातुन, एकता वर्मा आदि शामिल रही।