धर्मनगरी अयोध्या में समुत्कर्ष समरस भारत महायज्ञ का भव्य शुभारंभ राम कथा पार्क में हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और संत-महात्माओं के आशीर्वचनों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों ने सहभागिता की। महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर वक्ताओं ने समाज में समरसता, एकता और भाईचारे का संदेश दिया। वक्ताओ ने कहा कि भगवान राम केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, मर्यादा और लोककल्याण के प्रतीक हैं। राम के आदर्शों को अपनाकर ही समाज में शांति, सद्भाव और समानता स्थापित की जा सकती है। वक्ताओं ने कहा कि “राम को ही पकड़ कर रखना है, छोड़ना नहीं”। जब तक समाज राम के बताए मार्ग पर चलेगा, तब तक विभाजन, वैमनस्य और भेदभाव की कोई जगह नहीं रहेगी। राम का नाम समाज को जोड़ने और मानवता को ऊंचाइयों तक पहुंचाने की शक्ति देता है। संतों ने विशेष रूप से समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने, जाति-पांति और ऊंच-नीच से ऊपर उठने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। अभिनव भारत न्यास के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन अभिनव सिंह राजपूत ने किया। कार्यक्रम में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, संघ प्रचारक गंगा सिंह, महंत जनार्दन दास, महंत जयरामदास, महंत राम मिलन शरण, महंत सनत दास, डॉ दिलीप सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।