अमेठी में मुसाफिरखाना क्षेत्र के गुन्नौर गांव स्थित देवर्षि धाम में स्थापित अर्धनारीश्वर स्वरूप का स्वयंभू शिवलिंग देश का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। यह स्थल आस्था, रहस्य और मान्यताओं का ऐसा संगम बन चुका है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। पुजारियों और ग्रामीणों का दावा है कि इस शिवधाम पर देवर्षि नारद स्वयं दर्शन देने आते हैं। चार फीट ऊंचा और करीब 60 इंच चौड़े घेरे वाला यह शिवलिंग एक चट्टान से निर्मित है। इसके अग्रभाग पर अर्धनारीश्वर की छवि स्पष्ट दिखाई देती है। इसे अज्ञात काल में किसी ने आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन फिर भी यह जागृत प्रतीत होता है। शिवलिंग के समीप स्थित जलस्रोत को कभी कयाधू नदी कहा जाता था। मान्यता है कि यहीं पर देवर्षि नारद ने असुरराज हिरण्य कश्यप की पत्नी कयाधू को उपदेश दिया था। कालांतर में यह नदी अपभ्रंश होकर 'कादूनाला' कहलाने लगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस शिवलिंग की गहराई आज तक नहीं मापी जा सकी। 1960 के दशक में ग्रामीणों ने इसकी तीन स्टेप तक खुदाई की, लेकिन जब लगातार अरघा और लिंग एक ही शिला में जुड़े पाए गए तो भयवश खुदाई रोक दी गई। इसके बाद खुदाई करने वाले कुछ लोगों की मृत्यु हो गई, जिससे यह स्थान और भी रहस्यमय और श्रद्धा का केंद्र बन गया। बटवृक्ष के नीचे स्थित यह मंदिर अब दिव्य और जागृत धाम के रूप में जाना जाता है।