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Video: अंबेडकरनगर में शिक्षक निर्वाचन के लिए हुआ मतदान, छा रहे ये मुद्दे

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए जिले के नौ ब्लॉकों पर सुबह आठ बजे से मतदान जारी है। मध्याह्न 12 बजे तक कुल 41.68 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौरान कुल 1205 मत पड़े, जिनमें 936 पुरुष और 269 महिला मतदाता शामिल थे। अकबरपुर क्षेत्र पंचायत कार्यालय में 12 बजे तक 41.79 फीसदी मतदान हुआ। कटेहरी में 48.31 फीसदी और भीटी में 51.82 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। जलालपुर में 38.34 फीसदी, भियांव में 46.51 फीसदी और रामनगर में 35.16 फीसदी वोट पड़े। जहांगीरगंज में 59.73 फीसदी मतदान हुआ, जो सभी ब्लॉकों में सर्वाधिक रहा। बसखारी में 40.52 फीसदी और टांडा में 35.35 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। जिलाधिकारी ईशा प्रिया व पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने चुनाव के मद्देनजर बसखारी, जहांगीरगंज, भियांव और जलालपुर स्थित मतदान केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। शिक्षक एमएलसी चुनाव में पेंशन बहाली के साथ सेवा सुरक्षा और सम्मान भी रहे अहम मुद्दे अंबेडकरनगर। शिक्षक एमएलसी चुनाव में शिक्षकों के मतदान के पीछे पुरानी पेंशन बहाली की उम्मीद एक अहम मुद्दे के रूप में सामने आई। शिक्षकों का कहना है कि पुरानी पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद सम्मानजनक जीवन से भी जुड़ी है। इसी उम्मीद के साथ शिक्षकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उनके लिए यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी लंबित मांगों को आवाज देने का जरिया भी है। शिक्षकों के मुताबिक, नई पेंशन व्यवस्था को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित और भरोसेमंद आर्थिक सुरक्षा की चिंता उन्हें पुरानी पेंशन बहाली की मांग से जोड़े रखती है। शिक्षकों का मानना है कि शिक्षक प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए, जो सदन और शासन के सामने उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाए और केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में उनके मुद्दों के लिए सक्रिय रहे। पुरानी पेंशन के साथ वेतन विसंगति, सेवा शर्तों, पदोन्नति और शिक्षकों के सम्मान जैसे विषय भी चर्चा में रहे। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है कि शिक्षक खुद को सुरक्षित महसूस करें। अब शिक्षकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि पुरानी पेंशन बहाली समेत अन्य मांगों को लेकर कितनी प्रभावी पैरवी करता है।

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