अंबेडकरनगर: कल गांधी जयंती है। ऐसे में अकबरपुर का वह ऐतिहासिक गांधी आश्रम बरबस याद आता है, जहां महात्मा गांधी ने आजादी की लड़ाई के दौर में रात बिताई थी। एक अक्तूबर 1929 की वह रात अकबरपुर के इतिहास में दर्ज हो गई, जब बापू श्रीगांधी आश्रम पहुंचे और यहां से पूर्वांचल के लोगों को स्वावलंबन का संदेश दिया। जिस आश्रम में बापू ने विश्राम किया, आज वहीं उनकी प्रतिमा आजादी के उस दौर की याद दिलाती है। अकबरपुर के हृदय स्थल पर कभी एक छोटी सी झोपड़ी में शुरू हुआ यह आश्रम बाद में स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। 18 सितंबर 1927 को स्थापित क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम से पूर्वांचल ही नहीं, देश के कई हिस्सों में स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों को दिशा दी जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को जब इन गतिविधियों का पता चला तो 1942 में गांधी आश्रम को गैरकानूनी घोषित कर जब्त कर लिया गया और सत्याग्रहियों को प्रताड़ित किया गया। बापू आए तो दिया स्वावलंबन का मंत्र वर्ष 1929 में अकबरपुर पहुंचे महात्मा गांधी ने लोगों को कताई-बुनाई और स्वावलंबन के लिए प्रेरित किया। उनका संदेश था कि गांव और ग्रामीण अपने श्रम से मजबूत होंगे तो देश आत्मनिर्भर बनेगा। इस आश्रम के अधीन सात जिले आते हैं। आज भी जिंदा है बापू की याद आज गांधी आश्रम की पुरानी दीवारें और परिसर आजादी के संघर्ष की कहानी सुनाते हैं। जिस स्थान पर बापू ने विश्राम किया था, वहीं उनकी प्रतिमा स्थापित है। पास ही शिलापट पर उनके उद्बोधन अंकित हैं।