संगम की रेती पर फैले माघ मेले की भीड़ में उस दिन आस्था के साथ–साथ एक असहनीय पीड़ा भी बह रही थी। आगरा से आए एक दंपती के हाथ में बेटे की तस्वीर थी। उसी तस्वीर को सीने से लगाए वे हर चेहरे में अपने लाल को खोज रहे थे। कोई अनजान मिलता तो आंखों में उतर आई उम्मीद के साथ वे पूछ बैठते, भइया, क्या आपने इस लड़के को कहीं देखा है। भीड़ के शोर में उनकी आवाज़ कई बार दब जाती, पर सवाल हर बार वही रहता।