भाजपा काशी क्षेत्र के प्रभारी और राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने सोमवार को संसद के ऊपरी सदन में जनप्रतिनिधियों के लिए स्थाई कार्यालयों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि विधायकों को उनकी विधानसभा, सांसदों को लोकसभा क्षेत्र और राज्यसभा सांसदों, एमएलसी को उनके नोडल क्षेत्र में सरकारी कार्यालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सदन को संबोधित करते हुए सांसद अमर पाल मौर्य ने तर्क दिया कि देश में ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक के लिए सरकारी कार्यालय उपलब्ध हैं, लेकिन 788 सांसदों और 4549 विधायकों के लिए ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्यालय न होने के कारण जनता को अपने प्रतिनिधियों से मिलने में कठिनाई होती है और गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाती। कहा कि जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच सीधा संवाद ही लोकतंत्र का मूल आधार है, जो कार्यालय के अभाव में बाधित होता है। कहा कि केंद्र सरकार एक ऐसी राष्ट्रीय नीति बनाए जिसके तहत जिला, विकास खंड या तहसील स्तर पर स्थायी कार्यालय आवंटित हों। कार्यालय के संचालन के लिए एक कंप्यूटर ऑपरेटर/सहायक की नियुक्ति और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। सांसदों के कार्यालय लोकसभा स्पीकर और विधायकों के कार्यालय विधानसभा स्पीकर के माध्यम से संचालित हों। भाजपा गंगापार के मीडिया प्रभारी उमेश तिवारी ने बताया कि सांसद अमर पाल मौर्य की इस मांग का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है।