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VIDEO : विलुप्त लोक और जनजातीय कला को बचाने के लिए नई पहल, एनसीजेडसीसी में हुई प्रस्तुतियों ने मन मोहा

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से विलुप्त लोक और जनजातीय कला उत्थान महोत्सव का आयोजन बुधवार को ग्रुप केंद्र केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल परिसर फाफामऊ में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीआरपीएफ के उप महानिरीक्षक धीरज कुमार और उर्मिला शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपने प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की गुरु शिष्य परंपरा के प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत बाबू लाल भंवरा एवं प्रशिक्षित शिष्यों द्वारा “मगन हो कहती मैनारानी, आया फागुन मा शिव दानी, पनिया भरन गये बाबा के सगरवा तथा ऊंचे रे पहड़वा माई लिहन असनवा” बिरहा गायन की प्रस्तुति दी गयी। इसके बाद लखनऊ से आयी निधि एवं साथी कलाकारों ने “मैया चलो दियनाबार हमारे अंगना, दशरथ की अंगनिया बधैया भल बाजेही सोहर एवं बधाई गीत तथा गलियों तो गलियों रे बीबी मनरा फिरे” गीत पर मनरा लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। स्वाती निरखी ने संस्कार गीत “आई अंगना जगदम्बा भवानी, परछन गीत निंदिया से मातल दुल्हा झुकि झुकि जाई हे, रात को आ गए चोर तथा झूला नन्हीं नन्हीं बुंदिया री सावन का मेरा झूलना” की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। इसके बाद पूर्णिमा कुमार एंव दल द्वारा ढेड़िया, पूर्वी कटाई लोकनृत्य की प्रस्तुति “कवना के ढेड़िया कवन के दुलरिया पूजंचलि ढेड़िया ओ सवर्गोरिया” गीत पर ढेड़िया लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों से खूब तालियां बटोरी।

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